Betrayl


sappho's lament
Originally uploaded by fubuki














जीवन में फिर आये



यह बात और है या किस्सा पुराना

जो अजनबी हो जब लगे अपना सा

क्यों इतना डर लगता है, है यह खमोशी

है वहम कहीं का या है याद किसीकी

जब दिन थम जाये और रात बुलाये

खूनी , तुम मेरे जीवन में फिर आये



वही प्यार-भरे दो मीठे शब्द

आँखें जो करती हैं पीछा

संवेदना जैसे भटक गई हो

कुछ चाहती हो मुझसे कहना ?

क्यों लगता है सब पहचाना सा

क्या तुम्हें पहले भी अपनाया था

जंगल में जब आग लगती थी अक्सर

क्या तुमने पड़ों को सुलगाया था ?



जब झुका कर तुम सिर अपना

नही कर पाती मुझसे बातें

मुझे शांत पाकर चाहती हो

उगलवा लो सब मुझसे

मेरी बंद कर दो आँखें

मेरी आँखों का, उजाड़ लो उजाला

सपनों का महल धूमिल होता जाये

खूनी , तुम मेरे जीवन में फिर आये




कभी लगता है तुम वह नही हो

दिल चाहता है भरोसा करना

दे दूँगा अपना सब कुछ तुमको

मेरी खुशी का गला घोंट ना देना

हजारों सपने ,सब हैं तुम ही से

साथ चलकर मुझे कहीं छोड़ ना देना



चाहो रिश्ता जोड़ो मुझसे

ना करो अपनेपन में बातें

वक्त का क्या , गुज़र जाता है

तूफान एक दिन ठहर जाता है

अब बची नहीं उतनी शक्ती जीने की

मुझे मंझधार में फिर ना डुबो देना




साथ चलकर मुझे कहीं छोड़ ना देना

मेरी खुशी का गला घोंट ना देना

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