कण-कण तुम्हारा
तुम्हें ओढती-ढोलती जाऊँ मैं
गर बिस्तर पर बिछाऊँ मैं
टाँग दूँ अपनी दीवारों पर
नींद अपनी तुम्हें बनाऊँ मैं
कण-कण तुम्हारा हो मुझमें
तुममें डुब-डुबकी लगाऊँ मैं
सुबह मीचे आँख महसूस करूँ
हवा की ठंडक में पाऊँ तुम्हें
तुम्हारी आँख हो मेरे शीशे में
तुम्हें होठों से लगाऊँ मैं
कण-कण तुम्हारा हो मुझमें
तुम्हें कसते-लसते पाऊँ मैं
गीले बालों से छिड़कूं तुम्हें
हवा में चूमती जाऊँ मैं
निकल ना जाओ तुम रहो मुझमें
कमरे में बंद कर जाऊँ मैं
कण-कण तुम्हारा हो मुझमें
तुम्हें झूमती-चूमती जाऊँ मैं
तुम्हें ओढती-ढोलती जाऊँ मैं
गर बिस्तर पर बिछाऊँ मैं
टाँग दूँ अपनी दीवारों पर
नींद अपनी तुम्हें बनाऊँ मैं
कण-कण तुम्हारा हो मुझमें
तुममें डुब-डुबकी लगाऊँ मैं
सुबह मीचे आँख महसूस करूँ
हवा की ठंडक में पाऊँ तुम्हें
तुम्हारी आँख हो मेरे शीशे में
तुम्हें होठों से लगाऊँ मैं
कण-कण तुम्हारा हो मुझमें
तुम्हें कसते-लसते पाऊँ मैं
गीले बालों से छिड़कूं तुम्हें
हवा में चूमती जाऊँ मैं
निकल ना जाओ तुम रहो मुझमें
कमरे में बंद कर जाऊँ मैं
कण-कण तुम्हारा हो मुझमें
तुम्हें झूमती-चूमती जाऊँ मैं
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