"And In Between the Moon and You, Angels Get a Better View of the Crumbling Difference Between Wrong and Right" ~Adam Duritz, Counting Crows
Originally uploaded by giamarie
चाँद का टुकड़ा
चाँद का टुकड़ा चाहिये
नही चाहिये पूरा चाँद
हज़ारों सितारों से की दोस्ती
रोशन ना हुआ मेरा जहां
ऐसे कितने ही दिन गुज़ारे
रात किनारे, मिलते रहे सितारे
कितनों से की हमने दिल्लगी
जाने कितने अपने दिल में उतारे
आकाशगंगा के रंगीं सितारे
काफ़िला सा आये, मेरे द्वारे
उनको चूमा , बदन में उतारा
कुछ को बिछाया बिस्तर किनारे
कितना अकेला दिल था मेरा
अकेला शहर ,चुप सी धड़कन
हर पल ,लम्हा सितारों के सदके
सितारों ने भर लिया जीवन
पर फिर भी ना जाने क्यों
हरसूं यह दिल चाँद को पुकारे
लूट चुका है जो दिल की नगरी
मेरे आरज़ू , हसरत, उजियारे
सितारे जितने भी हुये हमारे
उनकी मीठी बातें ,कस्में-वादें
बहलाते रहे उनके अफसाने
पर गीत उनके ,ना हुए हमारे
कभी खाली सी ,कभी खोखली
कभी उदास सी, कभी नीरस सी
दो पल टिमटिमाना , बुझ जाना
सितारों की रास ना आयी दोस्ती
चाँद जब भी हमारे आँगन उतरा
बड़ा अपना सा, हमदम लगा
जितने पल उसने मुझे दिये
सपनों के रंग सब खिल गये
चाँद झोली न आये , न सही
एक कतरा रोशनी दे दे
दे अपना नूर , अपनी खमोशी
थोड़ी मोहब्बत, मदहोशी दे दे
चाहिये उसके साथ बढ़ना-घटना
बिछुड़ी अमावास की रात चाहिये
दे दे अपने दामन का दाग
खुशी नही ,गम का टुकड़ा चाहिये
नही चाहिये पूरा चाँद
चाहिये उसके दिल का टुकड़ा
न बनूँ चाँद की चाँदनी रात
थोड़ा उजला सा आसमां चाहिये
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